Monday, May 28, 2012

व्यक्तित्व है जीवन-ध्येय में पहुँच जाना [39]परिप्रश्नेन

३९. प्रश्न : Personality -या व्यक्तित्व किसे कहते हैं ?
उत्तर : अंग्रेजी भाषा के शब्द Personality और व्यक्तित्व ( Individuality.) में थोडा सा अंतर है। व्यक्तित्व के लिए सही अंग्रेजी शब्द है - Individuality. हिन्दी में दो अलग अलग शब्द नहीं हैं, इसलिए बातचीत के क्रम में या लिखते समय ' Personality Development ' को कई बार हमलोग ' व्यक्तित्व-विकास ' के अर्थ में भी प्रयोग करते हैं। क्योंकि हिंदी में  व्यक्तित्व कहने से ही  Personality -भी समझा जाता है, और Individuality.- भी समझा जाता है। किन्तु अंग्रेजी दो अलग अलग शब्द हैं-एक है Individuality. और दूसरा है  Personality.  किन्तु Personality.शब्द का सही अर्थ थोड़ा भिन्न होता है.
यह शब्द लैटिन के शब्द ' Persona ' से निकला है. जैसे कोई अभिनेता जब स्टेज पर किसी मेकप में खड़ा होता है- तो उसको देखने से ही अनुमान हो जाता है कि वह किसी ऐतिहासिक चरित्र को निभा रहा है, या अन्य किसी काल्पनिक घटना का कोई किरदार सामने खड़ा है. इसी वेश-भूषा को Persona, बनावटी चेहरा, (मुखौटा या Mask) कहा जाता था.
 जैसे अभिनेता के पूरे पोशाक और वेश-भूषा को देखने से ही उसकी भूमिका के सम्बन्ध में जो अनुमान होता है, उसको Personality. कहा जाता है. अर्थात उपर उपर से देखकर जिसके सम्बन्ध में जो धारणा होती है, उसको ही Personality. कहा जाता है. उसका आचार-आचरण, चेहरा, सौन्दर्य, कपड़ा-लत्ता, उसकी भाव-भंगिमा, चलने-फिरने का ढंग इन सबको मिला-जुला करवह जिस पात्र का अभिनय करता सा दीखता है, उसे Personality. कहते हैं, जिसको उपर से देखकर ही समझा जा सकता है।
किन्तु उसको देखने से उसके भीतर का भी संवाद मिल जाता हो, सो नहीं होता. जिस व्यक्ति या वस्तु को देखने से उसके भीतर का संवाद मिल जाता है, उसको Individuality.-कहा जाता है। वही किसी मनुष्य
 [ प्रसिद्द वैज्ञानिक हाकिंस महोदय भी कृत्रिम यंत्रों के सहारे सुनते, पढ़ते है, लेकिन आज वह भौतिक विज्ञान के क्षेत्र में दुनिया के सबसे श्रेष्ठ वैज्ञानिक माने जाते है.]
 का यथार्थ व्यक्तित्व होता है। Individuality. या प्रत्येक व्यक्ति जीवन-ध्येय, या किसी खास व्यक्ति का खास वैशिष्ट या पृथकत्व (जैसे सचिन तेंदुलकर-में क्रिकेट, लता मंगेशकर-संगीत, अमिताभ-अभिनय, न्यूटन में सच जानने की जिज्ञाषा, आदि अ..)  प्रत्येक मनुष्य का Individuality अलग-अलग होता है, अर्थात उनके व्यक्तित्व में कुछ विशिष्टता या पृथकत्व रहता है।

  कहने को हम सभी लोग मनुष्य हैं- काफी हद तक हमारे हाथ-पैर एक जैसे होते हैं. किन्तु प्रत्येक मनुष्य के भीतर अपना अलग अलग वैशिष्ट रहता है, जो और किसी के भीतर नहीं पा सकते.
 एक व्यक्ति का जो अपना वैशिष्ट है, वैसा अन्य दस लोगो में नहीं मिलता है, जो किसी व्यक्ति-विशेष का विशिष्ट-चरित्र होता है- उसको ही Individuality.कहा जाता है. तथा किसी व्यक्ति को उपर उपर से देखकर उसके बारे में जो सामान्य धारणा होती है, उसे उस व्यक्ति का Personality. कहते हैं. 

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