रविवार, 5 फ़रवरी 2023

🔱🙏परिच्छेद ~115, [ ( 23 मई , 1885 ) श्रीरामकृष्ण वचनामृत-115 ]🔱🙏🔱🙏 Time-Space and Causation को Transcend करने हेतु साधना चाहिए । साधना बताने में सक्षम नेतृत्व की उत्पत्ति। *Genesis of Leadership🔱🙏ईश्वरकोटि और जीवकोटि🔱 ब्रह्म और जगत -🔱🙏Nitya belongs to Him to whom the Lila belongs.🔱🙏आत्मा और ब्रह्माण्ड [Yoga, Subjective (साक्षी=द्रष्टा) and Objective (दृश्य), *समाधि और निर्वाण में अन्तर* 🔱🙏 प्रसंग तोतापुरी का रोना - क्या निर्वाण जीवन का अंत है?🔱🙏*The scene is Totapuri's cry*🔱🙏प्रेममय नेता नवनीदा भी नित्य हैं और उनका भक्त भी नित्य है🔱🙏ब्रह्म और जगत के विषय में श्री रामकृष्ण की सम्यक दृष्टि 🙏केवल शास्त्र ज्ञान व्यर्थ है - साधना से प्रत्यक्ष ज्ञान प्राप्त होता है🔱🙏कर्म योग या भक्ति योग - सतगुरु कौन है?🔱🙏क्या ईश्वर ( the embodiment of sweetness!) नीरस हैं ?🔱🙏 सांसारिक व्यक्ति नशे की स्थिति में होता है।🙏🔱🙏ज्ञान-अज्ञान से परे चले जाओ-दोनों काँटा फेंकना न भूलो 🔱🙏ज्ञान-अज्ञान और विज्ञान- त्रिगुणातीत हो जाओ 🔱🙏शरीर में रहते समय विद्यामाया को स्वीकार करना ही पड़ता है ।🔱🙏वासना में आसक्त बुड्ढे और वासना-दौलत से अनासक्त युवा🔱🙏 >>>Science of being 'Tripleless' (nistraigunya) :One must has to accept the Help of Vidyamaya

 परिच्छेद ~115, [ ( 23 मई , 1885 ) श्रीरामकृष्ण वचनामृत-115] परिच्छेद- ११५ (१)  [ ( 23 मई , 1885 ) श्रीरामकृष्ण वचनामृत-115] *राम के मकान मे...