मंगलवार, 25 फ़रवरी 2025

$$$🔱*परिच्छेद -४ , [ (10 दिसम्बर, 1881) श्री रामकृष्ण वचनामृत : परिच्छेद -४] $$$ "सरल विश्वास से क्या नहीं हो सकता ? सीप स्वाति नक्षत्र का जल लेने के लिए तैयार रहती है ।$$$ गृहस्थ के लिए क्या उपाय है ? गुरु-वाक्य में विश्वास । Satchidananda Himself who appears as the guru.“गुरु को मनुष्य नहीं मानना चाहिए । सच्चिदानन्द ही गुरु के रूप में आते हैं ।হাঁসে যেমন দুধ নিয়ে জল ত্যাগ করে। হাঁস পারে কিন্তু শালিক পারে না।” हंस दूध लेकर जल (देह-मन इन्द्रियों की गुलामी) को छोड़ देता है, पर केवल हंस ही ऐसा कर सकता है, बतख नहीं

  *परिच्छेद- ४* *राजेन्द्र (राम और मनोमोहन के मौसा) के घर पर श्रीरामकृष्ण* (१) राम, मनोमोहन आदि के संग में* राजेन्द्र मित्र का घर ठनठनिया म...

$$$🔱*परिच्छेद ३, [ (3 दिसम्बर, 1881) श्री रामकृष्ण वचनामृत : परिच्छेद -३ ] 🔱Real Heroes वीर भक्त ।🕊 🏹भक्ति प्राप्त करके फिर कर्म किया जा सकता है ।मर्कट-वैराग्य $$ भोग (Bh) का अन्त हो जाने पर तब त्याग का समय होता है । उनकी माया में अनित्य नित्य-जैसा लगता है, स्त्री-पुत्र, भाई बहन, माँ-बाप, घर-बार मेरे ही हैं ऐसा ज्ञात होता है $$अविद्या माया =(तीनों ऐषणाओं में आसक्ति) ईश्वर की याद भुला देती है, और विद्या-माया (=आत्म ? ज्ञान, भक्ति, साधुसंग) - ईश्वर की ओर ले जाती है ।*श्रीरामकृष्ण मनोमोहन के घर पर*

 [ (3 दिसम्बर, 1881) श्री रामकृष्ण वचनामृत : परिच्छेद -3 ]   *श्रीरामकृष्ण मनोमोहन के घर पर*  (१) *केशव सेन, राम, सुरेन्द्र आदि के संग में* ...