मंगलवार, 11 सितंबर 2012

'स्वामी विवेकानन्द और युवा समस्या की पहचान ' [ SVHS- 3.3 स्वामी विवेकानन्द और हमारी सम्भावना : खण्ड 3 -स्वामी विवेकानन्द और युवा समाज ] [>>>ग्रीक दर्शन के अनुसार शिक्षा छात्र को # 'capable of receiving बनाती है। भारत की गुरु-शिष्य परम्परा - पार्थसारथी अवतार वरिष्ठ के शिष्य स्वामी विवेकानन्द बचपन से ही हमारे सारथि बनना चाहते थे ! अंतर्निहित पूर्णता को अभिव्यक्त करने का उपाय बताती है। ] मनुष्य जीवन के उद्देश्य - 'मिथ्या अहंकार M/F देहाध्यास से भ्रम-मुक्ति और शाश्वत जीवन की प्राप्ति' /- "व्यष्टि अहं को सर्वगत अहं में रूपांतरित करने के व्रत के व्रती (votary)" हम युवा लोग कैसे बनें ?/ 'जेमन भाव, तेमन लाभ ' / ["जेहि कें जेहि पर सत्य सनेहू,सो तेहि मिलइ न कछु संदेहू॥"/मनुष्य के अमूर्त विचारों की अपेक्षा जीवन्त उदाहरण देखने से अधिक विश्वास होता है। /जब तक 'मुक्ति का रहस्य' उद्घाटित नहीं हो जाता, जीवन कभी स्थिर नहीं रह सकता है।/जर्मन साहित्य की प्रसिद्द रचना फ़ाउस्ट (Faust)-असीमित सांसारिक सुख भोगने के लिए अपनी आत्मा को ही शैतान के पास गिरवी रख देता है। / हस्तामलकस्तोत्रम्/

      स्वामी विवेकानन्द और हमारी सम्भावना     [Swami Vivekananda and our potential ]  [खण्ड 3 -स्वामी विवेकानन्द और युवा समाज]  [ Vol...