गुरुवार, 18 अप्रैल 2024

🕊🏹परिच्छेद 129~~योग तथा पाण्डित्य*🕊🏹 [ (30 अक्टूबर, 1885 ), श्री रामकृष्ण वचनामृत-129 ]🔱🕊🏹नित्य-राधाकृष्ण, और लीला-राधाकृष्ण🕊🏹🕊जो अविनाशी है (वृन्दावन के कृष्ण) वही नश्वर (द्वारकाधीश) बना है !🕊🏹 🙏🏹ज्ञानी के ध्यान का पहला तरीका -जल में कुम्भ, कुम्भ में जल है 🏹🕊🏹ईश्वर पुरुष है और जीव ["The pot (M/F)or 'I'-consciousness"] प्रकृति है/श्री श्री ठाकुर ने गृहस्थ भक्तों में पूर्ण की पहचान ईश्वरकोटि के रूप में की थी🕊🏹दूसरा तरीका ~ चिदाकाश में 'Skylark' आत्म-पक्षी विहार कर रहा है🕊[श्रीरामकृष्ण के दो किशोरभक्त पूर्णचन्द्र घोष और मनिन्द्रकृष्ण गुप्ता] 🔱🙏🕊🏹गुरु बिना ज्ञान, ज्ञान के बिना भक्ति नहीं होती🕊🏹 🏹मैं मुक्ति नहीं चाहता, मैं तो भक्ति चाहता हूँ🏹 🏹जिस व्यक्ति ने आनन्द -रस चख लिया, उसके मुख लट्ठमार बातें नहीं निकलेंगी🏹 🕊🏹छाया के निर्माण के लिए तीन शर्तें-सूर्य, वस्तु, और छाया का आधार 🕊🏹 🕊🏹ईश्वर के साथ मन के एकत्व का परिणाम है - समाधि ! 🕊🏹'शरीर हिल रहा' है, लेकिन हिला वे रहे हैं - कर्ता 'मैं' नहीं भगवान ही हैं !🕊🏹 (लोग कहते हैं पानी से हाथ जल गया - लेकिन पानी के भीतर ताप से हाथ जलता है।) 🏹 माईक पर क्यों पुकारना ?वे चींटी के पैरों में पड़ी पायल की आवाज भी सुन लेते हैं 🏹 (योगी के लक्षण~ अन्तर्मुख योगी~ बिल्वमंगल) 🕊🏹तंत्र में रमणी (अर्थात युवती और सुन्दर स्त्री) को माता (जननी) कहते हैं🕊🏹🕊🏹केवल ईश्वर ही सत्य है और बाकी सब कुछ - घर, परिवार, धन, मित्र, नाम और प्रसिद्धि - मिथ्या है!🕊🏹🕊🏹विवेक-वैराग्य के बिना केवल पाण्डित्य किसी काम नहीं आता 🕊🏹(पूरी गीता कण्ठस्थ करने की जरूरत नहीं 3 'ऐषणा -त्यागी' बन सकने से ही हुआ)🕊🏹 *श्रीरामकृष्ण की उच्च अवस्था : निरन्तर ब्रह्मदर्शन*

 [ (30 अक्टूबर, 1885 ), श्री रामकृष्ण वचनामृत-129 ] *परिच्छेद १२९~योग तथा पाण्डित्य* (१) श्यामपुकुर में भक्तों के संग में 🔱🙏 श्रीरामकृष्ण ...